Khayaalon ka Montage

Khayaalon ka Montage Khayaalon ka Montage
0 88.363895

no images yet

SHARE WITH OTHERS
See new updates

Khayaalon ka Montage

Latest Updates

Kshitij - Hindi Poetry Collection by Parul Chaturvedi

"अल्फ़ाज़ पिरोये हैं फ़लक तक धागे में,
सिरे खुले हैं गिरह बाँधी नहीं अब तक,
मोती हर रोज़ नये फिर मिल जाते हैं..."

क्षितिज के तो माने ही यह हैं कि जो कभी ख़त्म नहीं होता। माँ बाप के दिखाये क्षितिज का पीछा करते करते हम एक बार फिर उसी क्षितिज पर पहुँच जाते हैं जहाँ से सफ़र शुरू किया था, एक नये नज़रिये के साथ, तब महसूस होता है कि कुछ भी तो नहीं बदला।

मृदुला चतुर्वेदी 'ऋतू' ने जिस खयालों और अल्फ़ाज़ों के सफ़र का आगाज़ किया, उन्हीं अल्फ़ाज़ों की उंगली थामे पारुल चतुर्वेदी ने आज एक लम्बा फ़ासला तय किया है। यह काव्य संग्रह ज़मीन और फ़लक को जोड़ती एक मोतियों की माला ही तो है।

खयालों का मोंटाज की तरफ़ से पारुल चतुर्वेदी को अनेकों शुभकामनाएं, हम आशा करते हैं कि इस धागे में ऐसे ही मोती जुड़ते रहें...

   Over a month ago
SEND

Kshitij - Hindi Poetry Collection by Parul Chaturvedi

"अल्फ़ाज़ पिरोये हैं फ़लक तक धागे में,
सिरे खुले हैं गिरह बाँधी नहीं अब तक,
मोती हर रोज़ नये फिर मिल जाते हैं..."

क्षितिज के तो माने ही यह हैं कि जो कभी ख़त्म नहीं होता। माँ बाप के दिखाये क्षितिज का पीछा करते करते हम एक बार फिर उसी क्षितिज पर पहुँच जाते हैं जहाँ से सफ़र शुरू किया था, एक नये नज़रिये के साथ, तब महसूस होता है कि कुछ भी तो नहीं बदला।

मृदुला चतुर्वेदी 'ऋतू' ने जिस खयालों और अल्फ़ाज़ों के सफ़र का आगाज़ किया, उन्हीं अल्फ़ाज़ों की उंगली थामे पारुल चतुर्वेदी ने आज एक लम्बा फ़ासला तय किया है। यह काव्य संग्रह ज़मीन और फ़लक को जोड़ती एक मोतियों की माला ही तो है।

खयालों का मोंटाज की तरफ़ से पारुल चतुर्वेदी को अनेकों शुभकामनाएं, हम आशा करते हैं कि इस धागे में ऐसे ही मोती जुड़ते रहें...

   Over a month ago
SEND